जानिए धार्मिक कार्यों में मौली क्यों बांधी जाती है, क्या है इसके बांधने का मंत्र, महत्व और लाभ

जानिए धार्मिक कार्यों में मौली क्यों बांधी जाती है, क्या है इसके बांधने का मंत्र, महत्व और लाभ
जानिए धार्मिक कार्यों में मौली क्यों बांधी जाती है, क्या है इसके बांधने का मंत्र, महत्व और लाभ

जानिए धार्मिक कार्यों में मौली क्यों बांधी जाती है, क्या है इसके बांधने का मंत्र, महत्व और लाभ 

मौली को कलावा, मणिबंध, रक्षासूत्र, चंद्रमौली, लाल धागा, नाड़ा, संकल्पसूत्र या मणिबंध कहते हैं। 'मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर'। मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। इसका वैदिक नाम उप 'मणिबंध' भी है। मौली के भी प्रकार हैं। आओ जानते हैं कि धार्मिक कार्यों में क्यों बांधी जाती है मौली, और क्या है इसे बांधने का मंत्र, लाभ और महत्व।

मौली बांधने का मंत्र :

‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’ 

              

क्यों बांधी जाती हैं मौली : कहा जाता है कि कलावा बांधने से त्रिदेव, ब्रह्मा-विष्णु-महेश और तीनों देवी लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की कृपा बनी रहती है। लोग अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए मौली भी बांधते हैं। मौली भी किसी काम को शुरू करने के संकल्प के लिए बाँधी जाती हैं।

1. इसे कई मांगलिक अवसरों पर कलाई पर बांधा जाता है। यज्ञ, विवाह, पूजा, परिक्रमा, रक्षाबंधन, भाईदूज आदि अवसरों के दौरान यह बांधा जाता है।

2. मौली धार्मिक आस्था का प्रतीक है। किसी भी अच्छे काम की शुरुआत में वे आपको ढृढ़ संकल्प लेने के लिए बांधते हैं।

3. इसे किसी देवी या देवता के मंदिर में मन्नत से भी बांधा जाता है।

4. मूलतः मौली बांधने के 3 कारण होते हैं- पहला आध्यात्मिक, दूसरा मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय तीसरा कारण होता है।

5. कोई भी शुभ कार्य शुरू करते समय या कोई नई वस्तु खरीदते समय हम उस पर मौली बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में शुभता लाए।

6. हिंदू धर्म में, मौली को हर धार्मिक समारोह यानी पूजा, उद्घाटन, यज्ञ, हवन, संस्कार आदि से पहले पुजारियों द्वारा मेजबान के दाहिने हाथ पर मौली बांधी जाती है।

7. इसके अलावा हमारी गाय, बैल और भैंस को भी गुड़ी पड़वा, गोवर्धन और होली के दिन घरेलू पशुओं को मोली बाँधी जाती है। 

 

मौली बांधने के फायदे और महत्व :


1. तीन धागों का यह सूत्र त्रिदेवों व त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है। इस रक्षा-सूत्र को संकल्पपूर्वक बांधने से व्यक्ति पर मारण, मोहन, विद्वेषण, उच्चाटन, भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता।

2. यह मौली किसी देवी या देवता के नाम पर भी बांधी जाती है जिससे संकटों और विपत्तियों से व्यक्ति की रक्षा होती है। यह मंदिरों में मन्नत के लिए भी बांधी जाती है।

3. इसी में संकल्प निहित है। मौली बांधकर किए गए संकल्प का उल्लंघन करना अनुचित और परेशानी भरा साबित हो सकता है।

4. प्राचीनकाल से ही कलाई, पैर, कमर और गले में भी मौली बांधे जाने की परंपरा के ‍चिकित्सीय लाभ भी हैं। शरीर विज्ञान के अनुसार इससे त्रिदोष अर्थात वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। इससे ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है।

5. शरीर रचना का मुख्य नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है, इसलिए यहां मौली बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। उसकी ऊर्जा ज्यादा नष्ट नहीं होती है। शरीर की क्रिया विज्ञान के अनुसार शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं। कलाई पर कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित होती है।

6. मौली को बांधने से ऐसा लगता है कि यह एक पवित्र और शक्तिशाली बंधन है और इससे मन में शांति और पवित्रता बनी रहती है। किसी व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते और वह गलत रास्तों पर नहीं भटकता। कई मौकों पर यह व्यक्ति को गलत काम करने से बचाता है।
    
7. कमर पर बंधे मौली के संबंध में विद्वानों का कहना है कि यह सूक्ष्म शरीर को स्थिर रखता है और कोई अन्य बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है। मौली को अक्सर बच्चों की कमर पर बांधा जाता है। यह भी एक काला धागा होता है। इससे पेट में किसी प्रकार का रोग नहीं होता है।